वो वक्त भी आया जब मधुर भंडारकर (Madhur bhandarkar) लोकल ट्रेन में अखबार से अपना चेहरा ढककर सफर किया करते थे. मधुर के पास खाने तक के पैसे नहीं होते थे. जिंदगी एक बार फिर वहीं लेकर आई जहां से वो शुरू हुई थी.from Latest News बॉलीवुड News18 हिंदी https://ift.tt/30w4wuk
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